भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को हल करने के उद्देश्य से ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (One Nation One Ration Card – ONORC) योजना की शुरुआत की है। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत आने वाले लाभार्थियों को उनके स्थानांतरण के बावजूद पूरे देश में सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने का वादा करती है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह देश के किसी भी हिस्से में हो, अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सके। खासकर वे लोग जो रोजगार या अन्य कारणों से अपने मूल स्थान से दूर रहते हैं, उन्हें इस योजना से बड़ा लाभ मिलेगा।
एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना क्या है?
एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जो पूरे देश में राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी को सक्षम बनाती है। इस योजना के तहत, लाभार्थी अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान (Fair Price Shop – FPS) से खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।
योजना का उद्देश्य और मुख्य बिंदु
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: इस योजना का उद्देश्य हर नागरिक तक भोजन पहुंचाना है।
- प्रवासी मजदूरों की मदद: यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो रोजगार या अन्य कारणों से अपने राज्य से बाहर रहते हैं।
- डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली: राशन वितरण प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ePoS (इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल) उपकरणों का उपयोग किया गया है।
- राष्ट्रीय स्तर पर लागू: यह योजना अब पूरे भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है।
योजना का अवलोकन
पैरामीटर | विवरण |
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योजना का नाम | एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड (ONORC) |
शुरुआत वर्ष | 2019 (पायलट प्रोजेक्ट) |
लक्ष्य समूह | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत आने वाले लाभार्थी |
मुख्य सुविधा | राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी |
तकनीकी सहायता | राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) |
लाभार्थियों की संख्या | लगभग 80 करोड़ लोग |
प्रमुख उपकरण | ePoS मशीन और आधार आधारित प्रमाणीकरण |
लागत | ₹127 करोड़ (5 वर्षों में) |
योजना कैसे काम करती है?
- राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी:
इस योजना के तहत, लाभार्थी अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके किसी भी राज्य में उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न ले सकते हैं। - आधार आधारित प्रमाणीकरण:
राशन वितरण प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आधार नंबर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग किया जाता है। - डिजिटल प्लेटफॉर्म:
Integrated Management of Public Distribution System (IM-PDS) पोर्टल इस योजना को तकनीकी सहायता प्रदान करता है। - दोहरी सुविधा:
यदि परिवार के कुछ सदस्य मूल स्थान पर रहते हैं और कुछ दूसरे स्थान पर चले गए हैं, तो दोनों स्थानों पर खाद्यान्न प्राप्त किया जा सकता है।
योजना के लाभ
- प्रवासी मजदूरों को राहत:
यह योजना उन मजदूरों के लिए बेहद फायदेमंद है जो रोजगार के लिए अपने गांव या राज्य से बाहर जाते हैं। - पारदर्शिता में सुधार:
ePoS और डिजिटल सिस्टम की वजह से भ्रष्टाचार कम हुआ है। - खाद्यान्न की आसान उपलब्धता:
लाभार्थियों को उनके हिस्से का राशन देशभर में कहीं भी मिल सकता है। - महिलाओं और बच्चों को लाभ:
यह योजना परिवार के हर सदस्य को पोषण सुनिश्चित करती है।
आवेदन प्रक्रिया
आवेदन करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- अपने नजदीकी उचित मूल्य की दुकान पर जाएं।
- आधार कार्ड और मौजूदा राशन कार्ड साथ लेकर जाएं।
- ePoS मशीन पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करवाएं।
- सफल प्रमाणीकरण के बाद आपको आपका हिस्सा दिया जाएगा।
चुनौतियां और समाधान
चुनौतियां:
- सभी राज्यों में तकनीकी बुनियादी ढांचे का अभाव।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी।
- आधार प्रमाणीकरण में कभी-कभी तकनीकी समस्याएं।
समाधान:
- राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना।
- ePoS मशीनों को अधिक उन्नत बनाना।
एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना के प्रभाव
- अब तक 710 मिलियन पोर्टेबल लेनदेन किए जा चुके हैं।
- लगभग ₹40,000 करोड़ मूल्य का सब्सिडी वाला खाद्यान्न वितरित किया गया है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत दी।
Disclaimer:
यह लेख ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना पर आधारित तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करता है। यह योजना वास्तविक और भारत सरकार द्वारा लागू की गई है। इसका उद्देश्य देशभर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रवासी मजदूरों की मदद करना है।